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'श्रीपाद सेवा मंडळा'चे मुखपत्र
।। श्रीवामनराज ।।
त्रैमासिक

शक्‍तिपातयोग-साधनेविषयी सर्वांगीण चिंतन मांडणारे, प्रत्येक साधकाच्या घरी असलेच पाहिजे असे; सुबोध, संग्राह्य, अपूर्व आणि एकमेव मराठी त्रैमासिक.
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श्रीवामनराज प्रकाशन
प.पू.श्री.मामा यांची ग्रंथसंपदा
वाङ्मय
प्रकाशन क्र. मुखपृष्ठ ग्रंथनाम मूल्य प्रकाशन वर्ष पुस्तक परिचय पुस्तक परीक्षण
अनादि निर्गुण प्रकटली भवानी४०
१९८९
 
 
तो अध्याय सहावा४०
१९८९
 
 
येईजे पश्चिमेचिया घरा४०
१९८९
 
 
अभ्यासचि आपणयाते करी४०
१९८९
 
 
कुंडलिनी जागृतीसाठी श्रीगुरुकृपेची आवश्यकता४०
२०००
 
 
१०श्रीगुरुकृपेनंतरही अभ्यासाची आवश्यकता४०
२०००
 
 
१२अभंग चिंतन१००
१९९०
 
१३श्रीदत्तभावांजली१०
१९९७
 
१५हा अवधारीं पंथराजु५०
१९९०
 
१६बुद्धीची फुलिका विरे४०
२००१
 
 
२३श्रीदत्तमालामंत्रविधान२०
१९९२
 
 
३३अवीट गे माये विटेना१००
१९९४
 
 
३४नित्योपासनाक्रम३०
१९९७
 
 
३७श्रीगुरुचरित्र नित्यपाठ१२०
१९९६
 
 
४१सार्थ श्रीनारद भक्‍तिसूत्राणि१०
१९९५
 
 
४४श्रीपादवचनसुधा२०
१९९६
 
 
५४श्रीपाद वाक्सुधा, खण्ड १३५०
२००४
 
 
५५श्रीपाद वाक्सुधा, खण्ड २३५०
२००४
 
 
५६श्रीपाद वाक्सुधा, खण्ड ३३५०
२००४
 
 
५७श्रीपाद वाक्सुधा, खण्ड ४३५०
२००४
 
 
५८श्रीपाद वाक्सुधा, खण्ड ५३५०
२००४
 
 
५९श्रीपाद वाक्सुधा, खण्ड ६३५०
२००४
 
 
६०श्रीपाद वाक्सुधा, खण्ड ७३५०
२००४
 
 
१०८मज हृदयी सद्‍गुरु१२०
२००३
 
 
१०९अनादि निर्गुण भवानी प्रकटवादळु - कन्नड३०
२०००
 
 
१२६मुद्रेची प्रौढी ऐसी४०
२००२
 
 
१३५श्रीदत्तमालामंत्रविधान - कन्नड२०
२००२
 
 
१३७हरिपाठ मंजिरी-
२००४
 
 
१३८अभंग सौरभ१००
२००३
 
 
१३९अभंग अमृत-
२००४
 
 
१४०अभंग संजीवन-
२००४
 
१६८तीर्थ दर्शन७०
२००८
 
 
१७८वाड्‍अमय्‌ पारिजात१३०
२००७
 
 
१८०चैतन्यचक्रवर्ती७०
२००७
 
 
१८१देवा तूचि गणेश६०
२००७
 
 
१८६कैसे माझे गुणी धाले-
२००८
 
 
१८७इडा पिंगळा एकवटती-
२००८